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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

उपभोक्ता संस्कृति साहित्य की परियोजना के ही ख़िलाफ़ - जोनाथन फ्रेन्जन



जोनाथन फ्रेन्जन का नाम हमारी पीढ़ी के लिये अनजाना नहीं है। अपने हालिया उपन्यास 'फ्रीडम' से चर्चित जोनाथन के पेरिस रिव्यू को दिये गये एक साक्षात्कार से ये हिस्से हमने पत्रिका के वेबसाईट से लिये हैं।






स्वतंत्रता पर

जब मैं युवा था तो मेरा संघर्ष एक ‘अच्छा लेखक’ बनने का था। अब मैं अपनी लेखकीय योग्यताओं को लगभग मान कर चलता हूँ, हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि मैं हमेशा अच्छा ही लिखता हूँ। और काफ़ी हद तक ‘फ्रीडम’ लिखते समय मैने भाषा को लेकर ख़ुद को जितना आत्मचेतस पाया उतना पहले कभी नहीं। जैसे-जैसे मैं नये अध्याय लिखता जा रहा था बार-बार मैं ख़ुद से यह कह रहा था कि, ‘पिछले तीस साल के लेखन के दौरान जैसा मैने महसूस किया है यह एहसास बिल्कुल वैसा नहीं है – यह तो बिल्कुल पारदर्शी एहसास है।”…मैं यह स्वीकार करता हूँ कि मैं इस बात को लेकर सावधान था कि यह एक अच्छा संकेत था- कि इसका यह मतलब हो सकता था कि मैं कुछ अलग कर रहा हूं ,जिन कहानियों को मैं कह रहा था उन तक और उन कहानियों के पात्रों तक पूरी पारदर्शिता से पहुंचने के लिये भाषा को मैं और अधिक पूर्णता से उपयोग कर पा रहा था। लेकिन अभी भी यह शून्य में छलांग लगाने जैसा एहसास था।

लेखकीय मुखौटों पर

फिर बहुत कोशिशों और उनमें नाकाम होने के बाद मैने देखा कि कोई और ऐसा रास्ता नहीं था जिससे मैं अपने अनुभवों के कुछ केन्द्रीय हिस्सों, मेरी माँ के साथ के मेरे अनुभवों और मेरे वैवाहिक जीवन के अनुभवों के बारे में सीधे-सीधे लिख पाता। शर्म के मेरे एहसास और आंशिक रूप से दूसरे लोगों की इज्जत की रक्षा के एहसास ने प्रत्यक्ष ख़ुलासे को असंभव कर दिया था, लेकिन ऐसा विशेष तौर पर इसलिये हुआ कि वह सामग्री इतनी ‘हाट’ थी कि जब भी मैने उसे सीधे-सीधे लिखने की कोशिश की तो लेखन विकृत हो गया। तो परत दर परत मैने मुखौटे गढ़े। ठीक वैसे जैसे उन व्यक्तिगत भूमिकाओं को निभाने के लिये, कागज़ की लुगदियों को क्रम से लगाकर ज़िंदा आदमी के पुतले गढ़े जाते हैं, जिनको वैसे कोई निभा नहीं सकता।

सुधारों पर


जिस भय से यह किताब लिखी गयी थी वह यह था कि मस्तिष्क का नया भौतिकवाद जिसने हमें अपने व्यक्तित्व बदलने के लिये नशे दिये हैं और उपभोक्ता संस्कृति का वह नया भौतिकवाद जिसने हमें अंतहीन भटकावों तथा और अधिक माल की अंतहीन खोज को प्रोत्साहित किया है, साहित्य की जीवन के अपरिवर्तित तथा अपरिवर्तनीय त्रासद आयामों से जुड़ने वाली परियोजना के ही ख़िलाफ़ थे।

5 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी प्रस्तुति. इस लेखक में दम है. फ्रीडम तो खैर दूसरे कारणों से चर्चित रहा (ओबामा इस उपन्यास को छुट्टी के दौरान पढ़ने ले गये थे) पर इस लेखक का दस साल पहले का उपन्यास 'द करेक्शन' पढ़ कर मैं दंग रह गया. इस लेखक को पढ़ते हुए यह एहसास लगातार बना रहेगा कि लेखन में अभी भी कितना कुछ 'अनएक्सप्लोर्ड' है..

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  2. आमतौर पर एक पाठक मन में साहित्य और लेखक के पृष्ठभूमि और सोच के लिए जो जिज्ञासा होती है..उसका उत्तर है यह. लेखकीय मुखौटे की बात पर कई लोग स्वयं की चिकोटी काट कर देखेंगे...और फिर आश्वस्त होने पर पहने हुए कपड़ों को भी देखेंगे. सही एडिटिंग कहूँ और सही प्रस्तुति भी.

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  3. बहुत ही अच्छा चयन है आपका अशोक जी. फ्रेन्जन के बारे में सुना तो था, अभी तक उनका कुछ पढ़ नहीं पाया हूँ. आपका आभार कि आपके माध्यम से उनसे परिचय थोड़ा और गाढ़ा हुआ. बहुत बेबाक बयान है उनका. किताब तो अब पढनी ही पड़ेगी.

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  4. शुक्रिया मित्रों…बस इतना कि यह चयन मेरा नहीं है…वहां बस इतना ही हिस्सा है…इच्छा तो थी कि अगर पूरा साक्षात्कार मिल जाता तो उसका अनुवाद कर प्रस्तुत करता…

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