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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

भगत सिंह पर रामास्वामी पेरियार

भगत सिंह की फाँसी के बाद रामास्वामी पेरियार ने अपने अखबार 'कुडई आरसु' में जो सम्पादकीय लिखा था उसका हिस्सा...



जिस दिन गाँधी जी यह कहा कि भगवान उनका मार्गदर्शन करता है, संसार को चलाने के लिए वर्णाश्रम एक श्रेष्ठ व्यवस्था है और जो कुछ होता है भगवान की इच्छा से होता है, उसी दिन हम इस निर्णय पर पहुँच गए थे कि गांधीवाद और ब्राह्मणवाद में कोई फर्क नहीं है. हमने यह भी निष्कर्ष निकाला था कि देश का भला तब तक हो सकता जब तक कांग्रेस पार्टी जो इस दर्शन और सिद्धांत पर चलती है, समाप्त न हो जाएँ. लेकिन अब यह तथ्य कम से कम कुछ लोग मानने लगे हैं, उनके पास ज्ञान और साहस आ गया है कि वे गांधीवाद के पतन के लिए प्रयास कर सकें. यह हमारे उद्देश्य की महान सफलता है. यदि भगत सिंह को फांसी न दी गयी होती तो इतने लोकप्रिय ढंग इस विजय के आधार न होते. बल्कि हम तो यह बात कहने का जोखिम उठाते हैं कि यदि भगत सिंह को फांसी न हुई होती तो गांधीवाद को और ज़मीन मिली होती.


भगत सिंह बीमार पड़कर नहीं मरे, जैसा आम तौर पर लोगों के साथ होता है. उन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को वास्तविक समानता और शान्ति का मार्ग दिखाने के महान उद्देश्य के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया. भगत सिंह एक ऎसी ऊंचाई पर पहुँच गए हैं जहाँ सामान्यतया कोई नहीं पहुँच पाया. हमें उनकी शहादत पर हृदय से गर्व है. साथ ही साथ हम सरकार में बैठे लोगों से यह प्रार्थना करते हैं कि वे हर सूबे में चार भगतसिंह जैसे सच्चे आदमी ढूंढें और फाँसी पर चढ़ा दें.


साभार - जनसत्ता, २५ मार्च, २००७ 

8 टिप्‍पणियां:

  1. धार्मिक कट्टरता के गाल पर भगत सिंह करारा तमाचा है |

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  2. पेरियार की यह टिप्पणी प्रकाशित करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूं।

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  3. Ashok bhai , aapane yah dulabh tippani prastut kar mahtvapurn kam kiya. vishes roop se bhagat singh ke janm din par. ...aabhar.

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  4. Ashok bhai , aapane yah dulabh tippani prastut kar mahtvapurn kam kiya. vishes roop se bhagat singh ke janm din par. ...aabhar.

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  5. पेरियार का संपादकीय भगतसिंह पर पढकर खुशी हुई। आभार अशोक जी।

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  6. अशोक जी चंडीगढ में मचे धमाल के बाद पेरियार का यह संपादकीय लगाकर आपने बहुत अच्छा किया है। आभारी।

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  7. पेरियार का संपादकीय भगतसिंह पर पढकर खुशी हुई। आभार अशोक जी।

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