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शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

एक नयी पहल

सभी पाठकों को यह सूचित करते हुए हमे हर्ष हो रहा है कि ग्वालियर की इकाई ने ख़ुद को पुनर्गठित किया है। लम्बे बहस-मुबाहिसे के बाद हमने'दख़ल विचार मंच'के नाम से ख़ुद को पुनर्गठित किया है। यह मंच स्थानीय स्तर पर प्रगतिशील समाजवादी विचारों की स्थापना तथा प्रचार-प्रसार का काम करेगा। 'ख़ुद को बेहतर बनाते हुए दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिश' अब भी हमारा केन्द्रीय नारा है और उद्देश्य 'चुप्पी के माहौल में संवाद बनाने की कोशिश'।

इस मंच का संयोजक अजय गुलाटी को बनाया गया है जबकि संयोजन समिति में उनके अलावा जितेन्द्र बिसारिया और किरण होंगे। कोष की जिम्मेदारी ज्योति कुमारी की होगी तथा पत्रिका के व्यवस्थापक होंगे राजवीर राठौर्।

अब तक हम केवल युवाओं पर केन्द्रित थे लेकिन अब हमने सभी आयु वर्ग के लोगों को अपने साथ जोड़ने तथा विभिन्न विषयों पर गंभीर बहस-मुबाहिसे की योजना बनाई है। इसकी पहली कड़ी के रूप में हर माह के प्रथम रविवार को किसी सार्वजनिक स्थल पर अध्ययन चक्र चलाने का निर्णय लिया गया है।

साथ ही इस मंच के मुखपत्र के रूप में युवा दख़ल बुलेटिन को नियमित रूप से त्रैमासिक निकालने का भी निर्णय लिया गया है। इसकी पृष्ठ संख्या 16 होगी और मूल्य मूल्य 5 रुपये। इसका आगामी अंक नागार्जुन, शमशेर, केदार नाथ अग्रवाल तथा फैज अहमद फैज के जन्मशताब्दी के अवसर पर जन कविता अंक होगा। जो साथी इसमे सहयोग करना चाहते हैं इनमें से किसी कवि पर आधारित अपना लघु आलेख भेज सकते हैं। साथ ही पत्रिका की वार्षिक सहयोग राशि रु 25/- भेजकर भी आप हमारा सहयोग कर सकते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आगे बढे हुए इस कदम के लिए ढेर सारी शुभकामनायें. कोई कहता था न कुछ हो, सिर्फ एक सपना हो तो भी हो सकती है शुरुवात.... और यहाँ तो सपना भी है और शुरुवात भी.....ये भी ठीक कि मजिल दूर है और रास्ता कठिन, लेकिन ये रास्ता तो खुद एक मंजिल है. हम सभी हमराही इस रस्ते पर दूर तलक चल सकें, असहमति के साहस और सहमती के विवेक के साथ ....आमिन!

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  2. इस महत्वपूर्ण कार्य के लिये सभी सहभागियों को बधाई। अध्ययन चक्र के लिए स्थान एक न हो कर हर बार अलग हो तो नए लोगों को जोड़ने में सुविधा होगी।

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स्वागत है समर्थन का और आलोचनाओं का भी…